क्या आप चाहते है कि आपका दिन अच्छा बीते तो करे ये ?

प्रातःकाल – जागरण

प्रातः काल उठने के बाद स्नान से पूर्व जो आवश्यक विभिन्न कृत्य है,शास्त्रों ने उनके लिये भी सुनियोजित विधि-विधान बताया है। और आज का विज्ञान भी इसके प्रमाण दे चूका है. चाहे आध्यात्म से देखे, या विज्ञान से दोनों द्रष्टि से, प्रातः काल के नियम जरुरी है.गृहस्थ को अपने नित्य-कर्मों के अन्तर्गत स्नान से पूर्व के कृत्य भी शास्त्र निर्दिष्ट-पद्धति से ही करने चाहिये.तो आईये जाने क्या है- जागरण-कृत्य.

1. श्रोत्राचमन

२. श्‍लोकपाठ

1. – नींद से जागते ही बिस्तर पर बैठकर श्रोत्राचमन करें ।‘पासमें जल न हो, तो भी श्रोत्राचमन अवश्य करें ।’ –

श्रोत्राचमन अर्थात् दाहिने कान को हाथ लगाकर श्रीविष्णुके ‘ॐ श्री केशवाय नमः ।’… ऐसे २४ नामोंका उच्चारण करें । आदित्य, वसु, रुद्र, अग्नि, धर्म, वेद, आप, सोम, अनिल इत्यादि सभी देवताओंका वास दाहिने कान में रहता है, इसलिए दाहिने कान को केवल दाहिने हाथ से स्पर्श करने से भी आचमन का फल प्राप्त होता है । आचमन से अंतर्शुद्धि होती है ।

2. ब्राह्ममुहूर्त में जागरण- सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घंटे)पूर्व ब्राह्म मुहूर्त में ही जग जाना चाहिये। इस समय सोना शास्त्र में निषिद्ध है।दिन के क्रियाकलापों पर जीवन के चारों पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, कर्म और मोक्ष) का घनिष्ठ संबंध है। इनकी सहज और सुगम प्राप्ति के लिए करावलोकन–आँखों के खुलते ही दोनों हाथों की हथेलियों को देखते हुए निम्नलिखित श्लोक का पाठ करें.

“कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम् ”

अर्थ – ‘हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी, हाथ के मध्य में सरस्वती और हाथ के मूलभाग में ब्र्ह्मा जी निवास करते हैं, अतः प्रातः काल दोनों हाथों का अवलोकन करना चाहिये।’

3. भूमि-वन्दना- शय्या से उठ कर पृथ्वी पर पैर रखने से पूर्व पृथ्वी माता का अभिवादन करें और उनपर पैर रखने की विवशता के लिये उनसे क्षमा माँगते हुए निम्न श्लोक का पाठ करें–

“समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे”

अर्थ – ‘समुद्र्रूपी वस्त्रों को धारण करने वाली,पर्वतरूप स्तनों से मण्डित भगवान् विष्णु की पत्नी पृथ्वीदेवि ! आप मेरे पाद-स्पर्श को क्षमा करें।’रात्रिकाल में तमोगुण प्रबल होता है । ‘भूमिसे प्रार्थना कर ‘समुद्रवसने देवी…’ श्लोक कहकर भूमिपर पैर रखनेसे, रात्रिकालमें देहमें आवेशित कष्टदायक स्पंदन भूमिमें विसर्जित हो जाते हैं ।

निम्नलिखित श्लोकों का प्रातः काल पाठ करने से बहुत कल्याण होता है, जैसे–

१.- दिन अच्छा बीतता है,
२.- दुःस्वप्न,कलिदोष,शत्रु,पाप और भव के भय का नाश होता है,
३.- धर्म की वृद्धि होती है, अज्ञानी को ज्ञान प्राप्त होता है,
४.- रोग नहीं होता,
५.- पूरी आयु मिलती है,
६.- विजय प्राप्त होती
७.- भूख-प्यास और काम की बाधा नहीं होती तथा
८.- सभी बाधाओं से छुटकारा मिलता है इत्यादि।

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