गुरु की महिमा

एक बार एक संत समझा रहे थे की इस संसार में हमे ईश्वर ने हमे भेज दिया और कर्मो की स्वतंत्रता भी दे दी और पूर्व जन्मो के कर्मो की पोटली भी हमे ही दे दी की संसार में जाओ और जीवन जियो।
ईश्वर ने पूरा पूरा न्याय किया ।
लेकिन जब ईश्वर देखता है की मानव अपने कर्मो में ही उलझता चला जा रहा है तो वह दया करके,करुणा करके पूर्ण गुरु की शरण में उसको भेजता है।
और गुरु वो शक्ति होती है जो उसके कर्मो को साधना-सेवा की अग्नि में जलाकर भस्म कर देते है।
गुरु जीवन में ऐसे कुशल खेवनहार बनके आते है जो उसके जीवन के सत्य से उसका मिलन करवाने आते है।
इसीलिए गुरु की महिमा को ईश्वर की महिमा से भी अधिक बताया गया। और फिर सोचो गुरु की कितनी महिमा है।

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Posted in Sanatan/Hindu Life, Sanatan/Hindu Mythology

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