विदेशी जुबान देशी गुणगान | international view about BHARAT विदेशियों द्वारा स्वदेशी गुणगान :-

1.J. Robert Oppenheimer, American nuclear physicist (1904-1967)

यदि एक हजार सूर्य की चमक आसमान में फट पडे तो वह शक्ति सर्वशक्तिमान ईश्वर की महिमा की तरह होगा. . . . अब मैं दुनिया का विध्वंसक मौत बन गया हूँ ।

आधुनिक परमाणु विज्ञानी रोबर्ट ओपेन हैमेर ने अपने सफल परमाणु प्रयोग से उत्पन्न महाउर्जा को व्यक्त करने के लिए भगवद गीता का उपरोक्त वाक्य उद्धृत किया ।

वेदों को ग्रहण कर पाना इस सदी का भूतपूर्व सभी सदियों से सबसे बड़ा सौभाग्य है।

रोबर्ट ओपेन हैमेर गीता , महाभारत, वेदों तथा उपनिषदों के बड़े प्रशंसक थे :
2.Victor Cousin, French Philosopher (1792-1867)

जब हम भारत के कव्यात्मक तथा दार्शनिक विलक्षण ग्रन्थ ध्यान से पढ़ते है , हम वहां अनंत सत्य पाते है , वे सत्य गहन व् गंभीर है । और दूसरी ओर यूरोपीय प्रतिभा कभी कभी अधम निष्कर्षों पर पहुँच का रुक गई है । इन दोनों इतना अधिक वैषम्य है की हम पूर्व के दर्शन के सामने विनत होने को बाध्य होते है और मानव जाती के इस पालने में उद्धार्तम दर्शन की स्वाभाविक भूमि के दर्शन करते है ।

3.Hu Shih, former Ambassador of China to USA (1891-1962):

भारत ने २ ० शताब्दियों से चीन में एक भी सैनिक भेजे बिना सास्कृतिक रूप से विजय प्राप्त की और प्रभुत्व सत्ता प्राप्त की ।

4.Dr. Arnold Joseph Toynbee, British Historian (1889-1975)

यह स्पस्ट हो चूका है की जो सिलसिला पाश्चात्य सस्कृति धारण किये आरंभ होता है उसे मानवीय सभ्यता के पतन से बचने हेतु भारतीय दर्शनशास्त्र की और उन्मुख होना ही होगा . इस प्रकार भारतीय दर्शनशास्त्र ही मानवीय जाति का एक मात्र उद्धारक है ।

5.Albert Einstein (1879 -1955)

जब मैंने भगवद गीता पढ़ी तब मुझे ईश्वर द्वारा इस स्रष्टि की रचना करने का ओचित्य स्पष्ट हुआ ।

हम भारत के बहुत ऋणी हैं, जिसने हमें गिनती सिखाई, जिसके बिना कोई भी सार्थक वैज्ञानिक खोज संभव नहीं हो पाती।

6.Will Durant, American historian, (1885-1981)

भारत हमारी मातृभूमि थी , और संस्कृत यूरोप की भाषाओं की माँ थी, वह हमारे दर्शन की माँ थी, माँ, अरबों के माध्यम से, बहुत हमारे गणित के, माँ, महात्मा बुद्ध के माध्यम से, ईसाई धर्म में निहित आदर्शों की मां , ग्राम समुदाय के माध्यम से, स्वशासन और लोकतंत्र की. कई मायनों में भारत भूमि हम सब की मां है.

“शायद विजय, अहंकार और लूट के लिए बदले में, भारत हमें सहनशीलता और नम्रता परिपक्व मन की, अर्जनशील आत्मा की शांत , समझ आत्मा की शांति, और एक एकीकृत, सभी जीवित चीजों के लिए एक प्यार सिखाता रहेगा . ”

7.Sir William Jones, Jurist, (1746-1794)

संस्कृत भाषा ग्रीक भाषा से कहीं अधिक उत्तम , लेटिन से कहीं अधिक प्रचुर तथा किसी भी अन्य भाषा से कहीं अधिक परिष्कृत है ..

8.Ralph Waldo Emerson, Philosopher (1803-1882)

मैं भगवत गीता का अत्यंत ऋणी हूँ। यह पहला ग्रन्थ है जिसे पढ़कर मुझे लगा की किसी विराट शक्ति से हमारा संवाद हो रहा है।

9.Arthur Schopenhauer, German Philosopher (1788-1860)

विश्व भर में ऐसा कोई अध्ययन नहीं है जो उपनिषदों जितना उपकारी और उद्दत हो। यही मेरे जीवन को शांति देता रहा है, और वही मृत्यु में भी शांति देगा।

यह दुनिया की सबसे पुरस्कृत तथा मनुष्य को ऊपर उठाने के लिए है जो केवल इसी के द्वारा संभव है ।

मुझे लगता है कि संस्कृत साहित्य के प्रभाव से ही पंद्रहवीं शताब्दी में ग्रीक साहित्य का पुनरुद्धार हुआ था

10.Henry David Thoreau, American Philosopher (1817-1862)

प्रातः काल मैं अपनी बुद्धिमत्ता को अपूर्व और ब्रह्माण्डव्यापी गीता के तत्वज्ञान से स्नान करता हूँ, जिसकी तुलना में हमारा आधुनिक विश्व और उसका साहित्य अत्यंत क्षुद्र और तुच्छ जान पड़ता है।

जब कभी में वेदों के किसी भाग का अध्ययन करता हु तो मुझे ऐसा महसूस होता है मानो किसी पारलोकिक प्रकाश ने मुझे प्रबुद्ध कर दिया हो । वेदों के महान शिक्षण में सांप्रदायिकता का कोई स्थान नहीं है
यह विभिन्न उम्र, जलवायु, और देशों के लिए महान ज्ञान का उपयुक्त मार्ग है ।

11.Mark Twain, American Author (1835-1920)

मनुष्य के इतिहास में जो भी मूल्यवान और सृजनशील सामग्री है, उसका भंडार अकेले भारत में है।

12.Professor Max Muller, (1823-1900)

यदि में पूरी दुनिया की और यह जानने के उद्देश्य से देखूं जो देश के सबसे बड़े पैमाने पर धन, ताकत तथा प्रकृति प्रदत सुन्दरता के साथ संपन्न हो अर्थात धरती पर स्वर्ग की तरह ही हो ।
तो मैं भारत का नाम लूँगा

यदि मुझसे कोई पूछे की किस आकाश के तले मानव मन अपने अनमोल उपहारों समेत पूर्णतया विकसित हुआ है, जहां जीवन की जटिल समस्याओं का गहन विश्लेषण हुआ और समाधान भी प्रस्तुत किया गया, जो उसके भी प्रसंशा का पात्र हुआ जिन्होंने प्लेटो और कांट का अध्ययन किया।
तो मैं भारत का नाम लूँगा

और यदि में स्वयं से ही ये पूछूँ जो ज्ञान हमें अधिक व्यापक, हमारे भीतर के जीवन को और अधिक व्यापक बनाने के क्रम में एक अधिक सही मायने में मानव जीवन के सर्वाधिक वांछित है

तो मैं भारत का नाम लूँगा ।

13.The Encyclopaedia Britannica says:

यदि पृथ्वी पर ऐसा को देश है जहाँ अति प्राचीन मानव सभ्यता विकसित थी तो निसंदेह वह भारत ही है ।

14.George Harrison, Beatles (1943 – 2001)
प्रत्येक मानव जाती के लिए एक महत्वपूर्ण खोज यह जानना है की में यहाँ क्यू हूँ , कोन हूँ, कहाँ से आया हूँ , कहाँ जा रहा हूँ .
मेरे लिए तो यह सब जानना बाकि सभी कार्यों से अधिक महत्वपूर्ण स्थान रखता है ।

यहां हर कोई एक भौतिक स्तर पर कम्पायमान है, जो कहीं नहीं है वो भारत के लोक अध्यात्म के माध्यम से जान चुके है ।

15.Lin Yutang, Chinese writer, (1895-1976)

भारत साहित्य तथा धर्म के क्षेत्र में चीन का तथा त्रिकोणमिति, द्विघात समीकरण, व्याकरण, स्वर – विज्ञान, अरेबियन नाइट्स, पशु दंतकथाएं, शतरंज के रूप में अच्छी तरह से दर्शन के रूप में विश्व का गुरु था ।

“शतरंज की खोज भारत में ही हुई थी जिसका मूल चौसर था”

16.Aldous Huxley, English novelist (1894-1963)
गीता एक अत्यंत सुन्दर और संभवतः एकमात्र सच्चा दार्शनिक ग्रन्थ है जो केवल भारतियों के लिए नही अपितु समग्र मानवता के लिए है ।

17.Dalai Lama, (b-1935)
हिन्दू तथा बोद्ध , दोनों ही एक माँ की संतान है ।
“Hindus and Buddhists, we are two sons of the same mother.“

18.John Archibald Wheeler , Theoretical Physicist, who coined “Black Hole” (b-1911)

में सोचता हु की कदाचित कोई ये पता लगा पाए की भारतियों की गहरी सोच व् ज्ञान किसी प्रकार ग्रीस तथा ग्रीस से किस प्रकार हम तो पहुंचा ।

19.Guy Sorman, author of “Genius of India”:

यूरोप का लोकिक विचार व् ज्ञान भारत के ज्ञान के आगे फीका पड़ गया ।
बाइबिल, समय को मापने के लिए मापदंड बन गया था तब भारतीय ज्ञान विज्ञानं ने बताया यह दुनिया बाइबिल के बताये समय से कहीं अधिक प्राचीन है ।
तथा ऐसा भी लगता है मानो भारतीय ज्ञान विज्ञानं डार्विन के विकासवाद के सिद्धांतों तथा अन्य खगोल भौतिकी से भी कहीं अधिक उन्नत है ।

20.H.G. Wells, Sociologist, and Historian and Author of “Time Machine” and “War of the Worlds” (1866-1946)

भारत का इतिहास कई सदियों से किसी भी अन्य इतिहास से अधिक प्रसन्न ,सुरक्षित और अधिक सुन्दर स्वप्न की तरह है ।
वे एक ध्यान और शांतिपूर्ण चरित्र का निर्माण करते है जो भारत को छोड़कर कहीं अन्य पाया जाना संभव नही ।

21.Jean-Sylvain Bailly, French Astronomer, (1736-1793)

हिन्दुओं द्वारा लगभग ४ ५ ० ० वर्षों पूर्व खोजी गई ग्रहों की गति आज के समय में खोजी गई गति से एक मिनट भी ऊपर निचे नही होती ।
हिन्दुओं का खगोल विज्ञान अब तक का प्राचीनतम है । जिसमें से मिस्र, ग्रीक, रोमन और यहूदियों ने भी ज्ञान प्राप्त किया है ।

22.George Bernard Shaw, Irish dramatist, literary critic, socialist spokesman (1856-1950)

भारतीय जीवन शैली हमें जीवन के प्राकृतिक तथा सही मार्ग से अवगत करवाती है । जबकि हम अप्राकृतिकता रूपी अज्ञानता के अवरणों में ढके रहते है ।
भारत के मुख पर वे कोमल भाव रहते है जिन्हें स्वयं ‘रचयिता’ ने बनाया है ।

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