जब जोड़ों में हो दर्द तो क्या खाएं क्या न खाएं…???

पालक का साग अन्य रोगों में गुणकारी होता है क्योंकि इसमें लोह तत्व की मात्रा अधिक होती है। जो खून की कमी को दूर करता है, इसके बावजूद पालक, वातरक्त, संधिवात रोग में हानिकारक है। पालक में ऑक्जेनिक एसिड व चूना अधिक मात्रा में पाया जाता है।जिससे संधिवात रोग में पालक के सेवन से संधियों में यूरिक एसिड और चूने का संचय
अधिक होने लगता है। इससे रोग बढऩे लगता है। इससे रोग की वृद्धि होने लगती है।इसलिए गठिया के रोगी को पालक का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा टमाटर, लोबिया और उसके बीज, सेम की फली, आलू, सुखे अंजीर आदि वस्तुओं में भी पालक के उपर्युक्त दोष थोड़ी मात्रा में मौजूद है इसलिए वातरक्त रोग में ये हानिकारक है। इसलिए इनके सेवन से बचना चाहिए। चाय, काफी, कोको, चॉकलेट -इन वस्तुओं में भी पालक के उपर्युक्त दोष है इसलिए गठिया रोगी को इन वस्तुओं से दूर रहना चाहिए। शक्कर या शक्कर से बनी मिठाइयों की जगह, गन्ना, गुड़, खजूर, कालीमिर्च, दाख आदि का सेवन करना चाहिए।

ख्रट्टा दही, खट्टी छाछ या मठ्ठा, आम, इमली आदि खट्टे पदार्थ के सेवन से गठिया रोग बढ़ता है। इस रोग में ये वस्तुएं बहुत हानिकारक हैं इसलिए इनका उपयोग नहीं करना चाहिए। इनके अतिरिक्त ठंडी हवा और बहुत ठंडे पानी से भी रोगी को बचना चाहिए।

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