॥ पन्चमहायज्ञविधि ॥

** ओ३म का अर्थ **
जो अकार , उकार और मकार के योग से ओम यह अक्षर सिद्ध है ,सो यह परमेश्वर के सब नामों में उत्ताम नाम है , जिसमें सब नामों के अर्थ आ जाते हैं । जैसे पिता पिता पुत्र का प्रेम सम्बन्ध है , वैसे ही ओंकार के साथ परमात्मा का सम्बन्ध है ।
इस एक नाम से ईश्वर सब नामों का बोध होता है । जैसे –
अकार
१. विराट – जो विविध जगत का प्रकाश करने वाला है ।
२. अग्निः – जो ज्ञान स्वरुप और सर्वत्र प्राप्त हो रहा है ।
३. विश्वः – जिसमें सब जगत प्रवेश कर रहा है और जो
सर्वत्र प्रविष्ट है । इत्यादि नामार्थ अकार से जनना चाहिए ।
उकार
१. हिरण्यगर्भः – जिसके गर्भ मे प्रकश करने वाले सूर्यादि लोक हैं ,
और जो प्रकाश करने हारे सूर्यादि लोकों का अधिष्ठान है ।
२. वायुः – जो अनन्त बलवाला और सब जगत का धारण करने
हारा है ।
३. तैजसः – जो प्रकाश स्वरुप और सब जगत का प्रकाशक है ।
इत्यादि अर्थ उकारमात्र से जानना चहिए ।
मकार
१. ईश्वरः – जो सब जगत का उत्पादक , सर्वशक्तिमान स्वामी और
न्यायकारी है ।
२. आदित्यः – जो नाशरहित है ।
३. प्रज्ञः – जो ज्ञानस्वरुप और सर्वज्ञ है । इत्यादि अर्थ मकार से
समझ लेना । यह संक्षेप से ओंकार का अर्थ किया गया है ।

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